एक लाख भारतीयों को मांसपेशियों की सेहत के प्रति जागरूक करने के लिए डैनोन इंडिया की मुहिम
July 25, 2019 • Akram Choudhary

प्रोटीन सप्ताह 2019 : कॉर्पोरेट जगत में कार्यरत एक लाख भारतीयों को मांसपेशियों की सेहत के प्रति जागरूक करने के लिए डैनोन इंडिया की 
भारत की कामकाजी आबादी में हर 10 में से 6 की मांसपेशियों का स्वास्थ्य है खराब और प्रोटीन स्कोर है कम 
दिल्ली :डैनोन इंडिया', 'आरोग्य वर्ल्ड इंडिया ट्रस्ट' और 'इनबॉडी' मांसपेशियों के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने के मिशन पर हैं। वे इसके लिए प्रोटीन से भरपूर खानपान और सक्रिय जीवनशैली की दिशा में नजरिए और आदत-व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिशों में जुटे हैं। प्रोटीन सप्ताह 2019 की पहल के जरिए डैनोन इंडिया और उसके साझेदारों का उद्देश्य विशेषज्ञों द्वारा न्यूट्रीशन पर कार्यशालाओं और भारत में विभिन्न कॉर्पोरेट्स में मांसपेशियों की सेहत के मुफ्त आकलन की सुविधा देकर एक लाख कामकाजी भारतीयों को जागरूक करना है।
प्रोटीन से जुड़ा कुपोषण अब भी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। स्वस्थ मांसपेशियों के लिए प्रोटीन की भूमिका को लेकर जन जागरूकता पैदा करने के लिए हर साल 24 जुलाई से 30 जुलाई तक प्रोटीन सप्ताह मनाया जाता है। आईएमआरबी द्वारा 2017 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, 70þ से अधिक भारतीयों में प्रोटीन की कमी है, और 93 प्रतिशत भारतीय अपने लिए प्रोटीन की आदर्श आवश्यकता से अनजान हैं।
इनबॉडी और आईपीएसओएस द्वारा 2018 में किए गए एक अध्ययन का कहना है कि 70þ से ज्यादा कामकाजी भारतीयों की मांसपेशियों का स्वास्थ्य खराब है। जाहिर है, कामकाजी आबादी के बीच स्वस्थ मांसपेशियों के लिए प्रोटीन की भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने की तत्काल जरूरत थी। स्वस्थ मांसपेशियां बीमारियों की रोकथाम में भी अहम भूमिका निभाती हैं और एसोचैम (2018) की एक रिपोर्ट के अनुसार, खराब सेहत के चलते कार्य से होने वाली अनुपस्थिति में महज 1þ की कमी लाकर भारत का अनौपचारिक सेक्टर हर साल 20 अरब अमेरिकी डॉलर तक की बचत कर सकता है।
प्रोटीन सप्ताह 2019 की तैयारियों के सिलसिले में नोएडा, हैदराबाद और बेंगलुरु के विभिन्न कॉर्पोरेट्स में 40 हजार कामकाजी भारतीयों का ध्यान पहले ही इस ओर खींचा जा चुका है, और यह कार्यक्रम सितंबर 2019 तक अलग-अलग शहरों में एक लाख लोगों तक पहुंचना चाहता है। पहले चरण के शुरुआती निष्कर्ष दर्शाते हैं कि 10 में से कम से कम 6 भारतीय कामकाजी प्रोफेशनल्स में प्रोटीन की कमी है और मांसपेशियों की सेहत के पैमाने पर उनका स्कोर निचले दर्जे पर है।
डैनोन इंडिया के प्रबंध निदेशक हिमांशु बक्शी के मुताबिक, “वयस्कों में पोषण एक उपेक्षित क्षेत्र रहा है और इस आबादी को उचित पोषण की आवश्यकता के बारे में संवेदनशील बनाने के लिए सीमित पहलें ही हुई हैं। अपने ब्रांड प्रोटीनेक्स के जरिए डैनोन प्रोटीन और मांसपेशियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में इसकी भूमिका को लेकर संवाद और चर्चाओं में जुटा है। वह सक्रिय जीवनशैली को भी बढ़ावा दे रहा है ताकि लोग जीवन के अहम मौकों से न चूकें। प्रोटीन सप्ताह जैसे इनिशिएटिव्स और आरोग्य तथा इनबॉडी के साथ हमारी साझेदारी कॉर्पोरेट इंडिया के मध्य मांसपेशियों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगी, जो निष्क्रिय जीवनशैली और असंतुलित खानपान के चलते मांसपेशियों के खराब स्वास्थ्य से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। फूड के माध्यम से सेहत की सौगात के मिशन के साथ, डैनोन स्थानीय पोषण संबंधी जरूरतों की पूर्ति के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें प्रोटीन भी शामिल है।
आरोग्य वर्ल्ड की कंट्री मैनेजर सुमति राव के अनुसार, “आज के भारत में कर्मचारियों का प्रोटीन उपभोग कम और असंतुलित है। यह न सिर्फ उनके पेशेवर जीवन, बल्कि निजी जीवन को भी प्रभावित कर रहा है। आरोग्य वर्ल्ड इंडिया ट्रस्ट, डैनोन की प्रोटीन सप्ताह पहल का हिस्सा बनकर बेहद खुश है, जिसका उद्देश्य कॉर्पोरेट भारत को उचित पोषण की आवश्यकता और दैनिक जीवन पर इसके प्रभाव के बारे में संवेदनशील बनाना है। प्रोटीन और मांसपेशियों की सेहत के बारे में जागरूकता पैदा करना बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि लोग सेहतमंद जीवनशैली की दिशा में कदम उठा सकें।”
इस आयोजन में इनबॉडी इंडिया के प्रबंध निदेशक श्री केनेथ चा की भी उपस्थिति रही। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “प्रोटीन सप्ताह के लिए डैनोन के साथ अपने जुड़ाव को लेकर हमें प्रसन्नता है। मांसपेशियों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रोटीन के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने वाली यह एक अनूठी पहल है। इसके जरिए प्रोटीन और खानपान के बारे में बातचीत जिम और खेलों से आगे बढ़कर आम चर्चा का हिस्सा बनेगी। इसे हर उस व्यक्ति के लिए प्रासंगिक बनाया जाएगा जो एक स्वतस्थख जीवनशैली पर चलना चाहता है। प्रोटीन सप्ताह के दौरान मिले आंकड़ों से पता चलता है कि 64þ भारतीय कार्यबल में मांसपेशियों का स्वास्थ्य सामान्य से नीचे या खराब है। दुनिया के ज्यादातर विकसित देशों की तुलना में देखें तो यह हमारे लिए चिंता का विषय है। हमारी यह साझेदारी पोषण संबंधी इस कमी को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।”