सीता स्वयंवर व लक्ष्मण परशुराम संवाद ने मन मोहा
October 3, 2019 • Akram Choudhary

 

''उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा''
नोएडा। श्रीराम मित्र मण्डल नोएडा द्वारा आयोजित राम लीला मंचन सेक्टर-62  के चौथे दिन मुख्य अतिथि पी.के. अग्रवाल पूर्व अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी नोएडा  प्राधिकरण द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ लीला का शुभारंभ हुआ । श्रीराम मित्र मंडल राम लीला समिति के अध्यक्ष धर्मपाल गोयल एवं महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा द्वारा मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह प्रदान किया और अंगवस्त्र ओढ़ाकर स्वागत किया गया। दीप प्रज्वलन के पश्चात महात्मा गांधी जयंती के 150 वर्ष पूर्ण होने पर ज्योति चतुर्वेदी एवं निधि अस्थाना के निर्देशन मे विश्व भारती, खेतान पब्लिक, रेयान, समरविल एवं फादर एंजिल स्कूल के 2 से 9 वर्ष की आयु के बच्चों द्वारा स्वछता, भ्रष्टाचार एवं अहिंसा पर एक नाटक प्रस्तुत किया गया जिसके द्वारा समाज को संदेश दिया गया कि महात्मा गांधी की तरह सभी को अपने जीवन मे स्वछता एवं अहिंसा को अपनाना चाहिए और भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए अपना योगदान  देना चाहिए। राजा जनक का किरदार  पिछले वर्ष की तरह श्रीराम मित्र मंडल के महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा  द्वारा निभाया गया पिछले वर्ष की भांति अपनी कला का लोहा मनवाने मे कामयाब रहे दर्शकों द्वारा कला की भूरी भूरी प्रसंशा की । मुनि विश्वामित्र के साथ चलते-चलते जनक पुर के निकट पहुंच जाते हैं। विश्वामित्र के आगमन का समाचार सुनकर राजा जनक उनके पास पहुंचते हैं मुनि को प्रणाम कर जब दोनों भाईयों को देखते हैं । मुनि जी राम लक्ष्मण का परिचय देते है । महाराजा जनक शतानंद जी को बुलाकर मुनि विश्वामित्र को आमंत्रण भेजते हैं। मुनि विश्वामित्र राम लक्ष्मण के साथ धनुष यज्ञशाला देखने पहुँचते हैं जहाँ पर सीता का स्वयंबर होना है। सब से सुंदर मंच पर राम लक्ष्मण को मुनि समेत जनक जी बैठाते हैं। सीता जी को जनक बुलाते हैं ,और बंदीजन जनक की प्रतिज्ञा को बताते हैं कि जो भी यज्ञ शाला में रखे धनुष को तो ड़ेगा उसी के साथ सीता का विवाह होगा। रावण ,बाणासुर जैसे तमाम योद्धा आये लेकिन धनुष को हिला तक नहीं सके। यह देखकर जनक जी व्याकुल हो उठते हैं। इसके बाद जनक जी धनुष न टूटने पर विलाप कर कहते हैं कि लगता है अब पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है। लक्ष्मण जी उनकी बात सुनकर क्रोध कर कहते हैं कि अगर भईया राम आज्ञा दे यह धनुष क्या पूरा ब्रह्माण्ड को तोड़-मरोड़ डालू । राम जी लक्ष्मण को शांत करते हैं। इसके बाद विश्वामित्र भगवान राम को आदेश देते हैं''उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा''।भगवान राम धुनष की प्रत्युन्चा चढ़ाते हैं कि धनुष टूट जाता है सभी जनकपुर वासियों में खुशी दौड़ जाती है सीता जी राम को वर माला डालती हैं। सुर  नर मुनि फूलों की वर्षा करते हैं। शिव धनुष के टूटने की बात सुनकर परशुराम जी आते हैं और जनक जी को कहते हैं हे दुष्ट धनुष किसने तोड़ा है इसके बाद लक्ष्मणव परशुराम का संवाद होता है। बाद में परशुराम जी को ज्ञात हो जाता है कि राम और कोई नहीं साक्षात विष्णु का अवतार हैं और वह क्षमा मांगते हुए कहते हैं । क्षमा के बाद परशुराम जी महेंद्र पर्वत पर लौट जाते हैं। इसी के साथ चौथे दिन की लीला मंचन का समापन होता है । श्रीराम मित्र मंडल के मीडिया प्रभारी चंद्रप्रकाशगौड़ ने बताया कि 03 अक्टूबर को राम बारात शोभा यात्रा जनक जी द्वारा राम बारात स्वागत, राम जानकी विवाह, जानकी विदाई, श्रीराम राज्याभिषेक की घोषणा, मंथरा- कैकई संवाद, कैकई कोप भवन, दशरथ - कैकई संवाद आदि प्रसंगों का मंचन किया जायेगा। इस अवसर पर संस्थापक अध्यक्ष बी0पी0 अग्रवाल, मुख्य यजमान उमाशंकरगर्ग, उप मुख्यसंरक्षक ओमबीर शर्मा ओंकारनाथ अग्रवाल, अध्यक्ष धर्मपाल गोयल, महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र गर्ग, सह – कोषाध्यक्ष अनिल गोयल, सतनरायण गोयल, तरुण राज, मनोज शर्मा, मुकेश गोयल, मुकेश गुप्ता, संजय शर्मा, रविन्द्र चौधरी, आत्माराम अग्रवाल, मीडिया प्रभारी चंद्रप्रकाश गौड़, मुकेश गर्ग, एस एम गुप्ता, पवन गोयल,मुकेश अग्रवाल, सुधीर पोरवाल, राकेश गुप्ता,अजय गुप्ता, रामनिवास बंसल, ओपी गोयल,कुलदीप गुप्ता, चंद्रप्रकाश गौड़, ज्योति चतुर्वेदी, निधि अस्थाना सहित आयोजन समिति के पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे।