अबकी दिवाली स्वदेशी मनाएं :अंजना भागी
November 6, 2020 • Akram Choudhary

नोएडा(अमन इंडिया)।वर्षों से ऐसा ही होता आ रहा है कि दिवाली हमारी और मौज मनती है चीन में। वहाँ पर लगभगवव जुलाई माह से ही लड़ियों, जगमगाती भगवान कि मूर्तियों आतिश बाजी के सामान को बनाने का काम शुरू हो जाता है फिर भर भर माल पूरे भारत में बिकता है। हम भी दोनों हाथों से अपनी कमाई लुटवाते हैं और चाइनिज दिवाली मनाते हैं। मेरा प्रश्न आप सभी से है भगवान राम जब लंका से घर आये थे तो किसने चाइनिज लड़ियाँ लगाईं थी ? लोगों ने गेंदे के फूल हरी हरी पततियों के साथ जोड़ बंदन वार सजाये थे मिट्टी के दिवले जलाए, पकवान बनाए तथा मंगल गीत गाये थे। इस बार भी वर्षों बाद राम लला अपने घर प्रवेश कर रहें हैं तो दिवाली भी हम सबकी अपनों के साथ ही होनी चाहिए।   

समाज सेविका, नारी शक्ति संगठन की अध्यक्षा तथा शक्ति सौंदर्य एसोसिएशन (रजि) की , गौतम बुध नगर की अध्यक्षा ममता शर्मा लगभग सौ से अधिक महिलाओं को साथ ले कर कार्य रहीं हैं वे इस भ्रांति को भी सम्पूर्ण रूप से ठेंगा दिखा रही हैं की महिलाएं कभी एक नहीं हो सकतीं। महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए इन्होने शक्ति सौंदर्य एसोसिएशन (रजि) भारत के द्वारा गोबर से निर्मित प्रशिक्षण शिविर (वर्कशॉप) का आयोजन  नोएडा के सेक्टर 12 जेड ब्लॉक ऑफिस नंबर 9 में किया जोकि नारी शक्ति संगठन का कार्यालय है। इसमे लगभग 35 शिक्षित महिलाओं ने भाग लिया ये सभी महिलायेँ  दसवीं, 12वीं पास, ग्रेजुएट घरेलू, स्वरोजगार एवं नौकरी करने वाली, सभी तरह की तरक्की पसंद महिलायेँ थीं। इस प्रशिक्षण शिविर में दिल्ली से आए सहकार भारती के गोबर से निर्मित उत्पाद प्रशिक्षण के कोऑर्डिनेटर डॉ-राकेश त्रिपाठी जी ने सभी प्रशिक्षुओं को गोबर से दीया, श्री गणेश, श्री लक्ष्मी जी की मूर्ति बनाना सिखाया और उसके बाद सभी ने अपने हाथों से दीया तथा लक्ष्मी जी की मूर्ति बनाकर बड़े उत्साह से शिविर को संपन्न किया नारी शक्ति संगठन की महासचिव पुष्पा रावत, कोषाध्यक्ष सिम्पी सिंह उपाध्यक्ष माया रावत ने इस प्रशिक्षण शिविर को सफल बनाने में सम्पूर्ण योगदान किया और संकल्प किया की हम सभी महिलाएं गौ माता की रक्षा, सुरक्षा और संवर्धन करने का संकल्प लेते हैं देसी गौ माता के गोबर से दीया बनाकर इस दीपावली पर दीप मालिका बनाई जाएगी, इसलिए पूरे नोएडा गौतम बुध नगर जिले में इस गौ माता के गोबर से दीप और मूर्तियां बनाने का अभियान चलाया गया प्रशिक्षक जी द्वारा सिखाये गए इस कार्य को इन 35 महिलाओं ने ही आगे अन्य महिलाओं को सिखाया। क्योंकि महिलायेँ मल्टी टासकर होती हैं इसलिए सभी महिलाएं स्वयं सहायता समूह बनाकर इस उत्पादन को स्वरोजगार और आत्मनिर्भर होने का माध्यम मान आत्मनिर्भर भारत की ओर अपने कदम बढ़ा रही हैं । शक्ति सौंदर्य एसोसिएशन की अध्यक्षा श्रीमती रितु त्रिपाठी जी ने सभी में गौ माता के संरक्षण तथा पंच द्रव्य से उत्पाद निर्माण को लगातार करते रहने के लिए सब महिलाओं में  ऐसी अलख जगाई है कि नित्य कुछ महिलाएँ तो सेंटर पर तथा कुछ अपने घर पर सामान लेजाकर अपने परिवार के साथ लगातार दीये तथा मूर्तियाँ बना रही हैं । साथ ही जो भी महिला उन से जुडना चाहे सीखना चाहे आत्मनिर्भर बनना चाहे उसे सीखा भी रही हैं। महिलाओं को जागरूक करने के लिए उनका आत्मनिर्भर होना सबसे आवश्यक है,  महिलाओं के अधिकारों के बारे में जानकारी देने के लिए ये सांस्कृतिक गीत भी गाती हैं। महिलाओं को आधुनिक दौर में सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और वैचारिक दृष्टि से आगे बढ़ाने में भारत सरकार का योगदान सराहनीय हैं। महिलाएं आज के दौर में कड़ी मेहनत से पुरुषों के बराबर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रही है ऐसे में शहरी गरीब क्षेत्र में रहने वाली कामगार या घरेलू महिलाओं को भी सम्मान से जीवन जीने का पूरा अधिकार है घरेलू या कामकाजी महिलाएं अकसर काम के दौरान एवं घर की परिस्थितियों से या गरीबी से अभाव में मानसिक तनाव एवं शाररिक तनाव से ग्रसित होती है इसलिए इन महिलाओं की किसी भी सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में पूर्ण रूप से भागीदारी भी नहीं हो पाती है। परिवारों में अशिक्षा, साधन न होते हुए भी पुरुषों द्वारा शराब का अत्यधिक सेवन से घर में लड़ाई झगड़े का खतरा बना  रहता है इनको अनपढ़ होने से कहीं कहीं तो रोजगार के अवसर प्राप्त ही नहीं होते हैं बल्कि बच्चे भी खासकर बेटियाँ अक्सर ही  शिक्षा से वंचित रह जाती हैं ऐसे में हम सभी का ये कर्तव्य हो जाता है कि बजाय ऑन लाइन सर्च करने के,  कि कहाँ कितने प्रतिशत डिस्काउंट दिखा हमें लुभाया जा रहा है को छोड़ हम सभी को अपने आस पास के दुकान दारों से रेहड़ी- पटरी वालों से छोटे –छोटे दूकानदारों से त्योहारों पर सामान खरीद स्वयं और उनको भी दिवाली मनाने का पूरा पूरा अवसर देना चाहिए। मिठाइयाँ अपने आस- पास के हलवाइयों से ही खरीदें राम लला क्यों जानने लगे चाकलेट का स्वाद। खोया दूध पर शक आए तो भारत में तो हलवाई अनगिनत बेसन मैदा के पकवान भी बनाते हैं । कोरोना सांस की ही तो बीमारी है इसलिए न लाये न छुटायें चीन के पटाखे अच्छा संगीत बजाये मिलजुल मनाएँ अपने त्योहार अपनों के साथ। भारत कि गिरती हुई जी डी पी क्यों न हम सब मिलकर उठाएँ। यकीन मानिए यदि अब हम सब ने मिलकर अपनों को न उठाया तो इनमे से बहुत सारे नहीं झेल पाएंगे महामारी तथा गिरती जी डी पी कि मार । यकीन मानिए त्योहार के बाद फूल पति पशु खायेंगे। मिट्टी तथा गौ माता के गोबर से बने भगवान फिर से माटी में समाएंगे। अपनों के साथ गाना – खाना मानसिक तनावों से बचाएगा, दिवाली पर तेल के दीये जलाने से वातावर्ण भी शुद्ध हो जायेगा। घर भर लड़ियाँ लगाने। पटाखे छुड़ाने से तो 10-20 दीये घर, पर्यावरण तथा अपनों को सुख चैन देंगे। भारत का हर नागरिक यदि इस सोच को अपनाएगा तो अपनी समझदारी से भारत की जीडीपी को भी उपर ले जायेगा। तो करें वायदा अबकी अपनी दिवाली अपनों के साथ क्योंकि राम लला घर आए हैं ।