कोरोना वायरस के एक सबटाइप का नाम:डॉ राजेश गुप्ता
March 11, 2020 • Akram Choudhary

नोएडा(अमन इंडिया):डॉ राजेश गुप्ता  एडिशनल डायरेक्टर फोर्टिस अस्पताल नोएडा इन्टेन्सिव केयर एंड क्रिटिकल केयर, पल्मोनोलॉजी COVID-19 – हम कितना जानते-समझते हैं  COVID-19 दरअसल, कोरोनावायरस के एक सबटाइप का नाम है, जिसकी पहचान चीन के वुहान प्रांत में दिसंबर 2019 में अज्ञात कारणों से फैलने वाले निमोनिया के दौरान की गई थी। उसके बाद से वायरस भारत समेत दुनिया के कई भागों में फैल चुका है। अभी तक 90,000 से अधिक लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं और 3200 से ज्‍यादा लोगों की जान जा चुकी है। 
COVID-19 की वजह से सांस लेने के रोग पैदा होते हैं जिनमें निमोनिया के हल्‍के से लेकर गंभीर किस्‍म के लक्षण शामिल हैं और उपचार के लिए गहन चिकित्‍सा देखभाल जरूरी होता है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोनावायरस से संक्रमित करीब 80% मरीज़ों को किसी किस्‍म के उपचार की जरूरत नहीं होती और वे तत्‍काल स्‍वस्‍थ भी हो जाते हैं। लेकिन हृदय रोगों, उच्‍च रक्‍तचाप, मधुमेह, सीओपीडी तथा कैंसर से प्रभावित बुजुर्गों (60 वर्ष से अधिक उम्र) में इसकी वजह से गंभीर रोग पैदा होने की आशंका अधिक है और ऐसे करीब 25 फीसदी मरीज़ों की मृत्‍यु भी हो सकती है। 
COVID-19 संक्रमित व्‍यक्ति जब खांसता या बोलता है तो उसके मुंह से निकलने वाले छींटों के जरिए करीब 3 फुट के दायरे में कोरोनावरस फैलता है। ये वायरस आसपास की सतहों पर चिपक जाते हैं। इस प्रकार संक्रमित हुए स्‍थान (3 फुट) के संपर्क में आने वाला कोई भी व्‍यक्ति सांस के जरिए वायरस संक्रमण का शिकार बन सकता है। इसी तरह, ऐसी संक्रमित सतह को छूने के बाद यदि कोई व्‍यक्ति अपना मुंह या नाक छूता है तो उस स्थिति में भी वायरस उस व्‍यक्ति को सीधे संक्रमित कर सकता है। 
बचाव के लिए साबुन और पानी से 20 सेकंड तक हाथ धोएं या एल्‍कोहल आधारित हैंडरब का इस्‍तेमाल करें। जरूरी न हो तो चेहरे को न छुएं। दूसरों से हाथ मिलाने से बचें। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने सलाह दी है कि मास्‍क सिर्फ स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों और COVID-19 संक्रमण से प्रभावित व्‍यक्तियों तथा उनके परिजनों और उनकी देखभाल करने वाले करीबी लोगों को ही लगाना चाहिए। इसी तरह, जुकाम और खांसी से पीड़‍ित मरीज़ों को उपयुक्‍त व्‍यवहार (Cough Etiquettes) का पालन करना चाहिए। 
फिलहाल COVID-19 से बचाव की कोई दवा या वैक्‍सीन नहीं है। हालांकि क्‍लोरोक्विन से इस संक्रमण के सफल इलाज को लेकर कुछ अपुष्‍ट खबरें भी आयी हैं, लेकिन विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन द्वारा इनकी सिफारिश नहीं की गई है।