रेनबो लिट फेस्ट में देवदत्त पटनायक ने कहा, भारत में क्वीर के बारे में रामबहुत कुछ कहना चाहते थे
December 12, 2019 • Akram Choudhary

 

नर्इ दिल्ली(अमनइंडिया):बायनेरिज़ से परे जाकर और समाज की विभिन्न पहचानों और वर्गों को एक साथ लाने के लिएरेनबो लिट फेस्ट - क्वीर एंडइनक्लूसिव में लोगों की एकजुट आवाज सुनने को मिली। इस दो दिवसीय उत्सव मेंवैकल्पिक और मुख्यधारा का संगम देखने को मिला। यह सम्मेलनअभिव्यक्ति के विभिन्न रूपों के समामेलन का गवाह बनाजहाँ गद्यकविताकलासंगीतनृत्य और सिनेमा के 70 से अधिक रूप एक साथ एक ही मंच पर नजरआए। फेस्ट के पहले संस्करण के लिए 1000 से अधिक लोगों ने पंजीकरण किया। वहीं दो दिनों में 1,300 से अधिक लोग फेस्ट में पहुंचे।

फेस्ट की शुरुआत बेहद शानदार रही और देव दत्त पटनायकशुभा मुदगलअंजलि गोपालन और माया शर्मा जैसे वक्ताओं ने इस फेस्ट में शिरकत की। श्रोताओंको संबोधित करते हुए भारतीय मायथोलॉजिस्ट देवदत्त पटनायक ने रामचरित मानस की चौपाई बोलते हुए कहा -  “नरनपुंसकनारी जीवचरा-चर कोईसर्वभावभजकापत्ताजीमोहे प्रणाम प्रियसोई। चौपाई का अर्थ हैपुरुषनपुंसकस्त्रीवनस्पतियां और जीव सभी मुझे प्रिय हैं यदि वे बिना किसी द्वेष के मेरे पासआते हैं। हमें रेनबो लिट-फेस्ट में राजनीतिक रूप से सही होने की जरूरत नहीं हैयह भरी दोपहर में राजनीतिक अंधियारा कमरा है। अपने सत्र के दौरानउन्होंनेकहा, “एक संपूर्ण पुरुष वह है जो स्त्रीत्व को अपनाता है। यदि कोई कहता है तुम अलग होतो आप वह राह हो जिसके माध्यम से गरिमा का एहसास होता है।

 

विख्यात हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायिका शुभा मुदगल ने कहा"आजहमें हाथ मिलाकर हिंसाघृणा और अन्याय से लड़ने के लिए एकजुट होने की जरूरतहै।"

 

फेस्ट के दूसरे दिननंदिता दाससैफ महमूदओनिरदेवदत्त पटनायक ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। स्पॉट लाइट सैशन में ओवैस खानरफीकुल दोजाहऔर पवन डहल जैसे वक्ता उपस्थित थेइस सत्र का शीर्षक 'व्हेन दे गिव अस प्राइड-स्टोरीज फ्रॉम  फर्स्ट प्राइड'; वहीं ' स्ट्रेंज रिलेशनशिप बिटवीन लिट्रेचर एंडलॉ' विषय के पैनल में देवदत्त पटनायक और मेनका गुरुस्वामी शामिल थे।

अंजलि गोपालन के साथ अपनी बातचीत मेंनंदिता दास ने कहाआजहमने हिंसा को वैध कर दिया है लेकिन प्यार के प्रति हमारी कोई स्वीकृति नहीं है। मैंउस समुदाय का हिस्सा हूं जो लोगों के अधिकारों के लिए लड़ता है और उनकी पहल का समर्थन करता है। यह एक लंबी यात्रा है। हमें मौजूदा दौर में वास्तविकअभिव्यक्ति को सामने लाने और उनकी आवाज़ उठाने के लिए फिल्म उद्योग में क्वीर समुदाय से अधिक लोगों के जुड़ने की आवश्यकता है। प्रभाव पैदा करने केलिए हम सभी के पास अपना एक स्थान है।"

देवदत्त पटनायक के साथ एक बातचीत में सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामीने भारत में विविधता को स्वीकार करने की बात करते हुएकहा"वहां तक पहुंचने या नहीं पहुंचने की क्षमताशायद व्यक्ति की कल्पना से जुड़ी हुई है।"

 

मानसून डेट की स्क्रीनिंग के बादपटकथा लेखक गजल धालीवाल अपनी मां की प्रतिक्रिया के बारे में बात करते हुए कहा"मेरी माँ हमेशा से एक चिंतितमहिला रही हैंऔर उन्हें मानसून डेट के बाद थोड़ी सांत्वना मिली थी।"

 

फेस्टिवल के डायरेक्टर श्री शरीफ डीरंगनेकर ने कहा, फेस्टिवल का रिस्पॉन्स देखकर मैं काफी अभिभूत था और यह दर्शाता है कि इस तरह की चर्चाओंऔर ईवेंट की काफी जरूरत है। हमें यकीन है कि हम अगले साल भी वापस आएंगे और पिछले दो दिनों में हमें मिले रिस्पॉन्स के आधार पर ईवेंट तैयार करेगे।

इस संजीदा बातचीत के बीच कई प्रतिष्ठित फिल्में भी प्रदर्शित की गईजिसमें एक साइलेंट गे लव स्टोरी:ख्वाहिशभारत की पहली एलजीबीटीक्यू लव स्टोरीसिसकमानसून डेटआई एम सुन्जो जैसी अन्य फिल्में शामिल थीं। इन फिल्मों को दर्शकों की ओर से जबर्दस्त तारीफें मिलीं। ईवेंट की इसी जोश रफ्तार कोबनाए रखते हुए यहां कई अन्य साहित्यिक पेशकश की गईंजिसमें एक स्पेशल एडिशन मैगजीन क्यू एंड आई की लॉन्चिंगअवंतरी देवी का दिलचस्प ड्रैग टॉकऔर वरुण नारायण का पपेट शो शामिल है।

जहां पहले दिन के एक समारोह का समापन प्रतिष्ठित निज़ामी ब्रदर्स द्वारा पेश किए गए महफिल--कव्वाली के एक शानदार पर्फोर्मेंस के साथ हुआदूसरे दिनअजहर इकबाल की मेजबानी में मुशायरा सुनने को मिलाजिसकी अध्यक्षता परवेज आलम ने की थी। यह फेस्ट देश में सबसे खास रॉक बैंड ' ओरिजिनलनॉक-ऑफ्सकी दमदार और आकर्षक पर्फोर्मेंस पर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ संपन्न हुआ।

फेस्ट को आठ सदस्यीय सलाहकार समिति से समर्थन प्राप्त थासमिति में अंजलि गोपालन (संस्थापकनाज़ फाउंडेशन)अपूर्व असरानी (राष्ट्रीय पुरस्कारविजेता फिल्म निर्माताफिल्म संपादक और पटकथा लेखक)माया शर्मा (लेखक और कार्यकर्ता)परमीश शाहनी(संस्थापकगोदरेज इंडिया कल्चर लैब)सलीम किदवई (इतिहासकार एवं क्वीर कार्यकर्ता)डॉसैफ महमूद (लेखककार्यकर्ता और वकील)विवेक मनसुखानी (शिक्षाविद् और थिएटर शख्सियत )और जैनब पटेल (मैनेजरडीएंडआईकेपीएमजीशामिल हैं। फेस्ट की परिकल्पना शरीफ डीरंगनेकर (फेस्टिवल डायरेक्टरद्वारा की गई है। वे स्ट्रेट टूनॉर्मल - माई लाइफ एज  गे मैन के लेखक है। यह किताब इस साल की शुरुआत में रिलीज़ की गई थी। यह पिछले सितंबर में धारा 377 की नई व्याख्या के बादपेश किया गया पहला संस्मरण है। इस फेस्ट का सह प्रस्तुतिकरण रंगेकेकर द्वारा तैयार किए गए प्लेटफॉर्म एंब्रेस:म्यूजिक जस्टिस आर्ट्स और क्रिएटिवडायरेक्टरपंकज मलहोत्रा की ईवेंट कंपनीएपिक इंडिया द्वारा किया गया था।